शनिवार, 10 मार्च 2018

कुंडलिनी ९९

कुंडलिनी छंद
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शिक्षा मिले गरीब को, करें गरीबी दूर।
बिन शिक्षा के कुछ नहीं, सपने चकनाचूर।
सपने चकनाचूर, न देता कोई भिक्षा।
कह प्रताप अविराम, सदा लो पहले शिक्षा।
________________________प्रताप

मुक्तक

शीर्षक- आनंद की अनुभूति

दुखों में रोकर मिलता है, सुखों में हँसकर मिलता है
क्षुधा-पीड़ित हो प्राणी जो, उसे तो खाकर मिलता है।
जगत में मैंने देखा है, सभी की अपनी विधियां हैं-
पर ! मुझको तो बस आनंद, नव-छंद लिखकर मिलता है।
#प्रताप